छत्तीसगढ़
करंट लगाकर शिकार की आशंका, अभ्यारण में दो राजकीय वन भैंसों की मौत से हड़कंप
Shantanu Roy
16 Dec 2025 8:19 PM IST

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छग
Kawardha. कवर्धा। जिले में एक बार फिर राजकीय पशु वन भैंसा की मौत ने वन विभाग और वन्यप्राणी संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोरमदेव अभ्यारण के अंतर्गत जाम पानी क्षेत्र में करंट की चपेट में आने से दो वन भैंसा (Wild Water Buffalo) की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि शिकारियों ने जानबूझकर करंट फैलाकर इन दुर्लभ और संरक्षित वन्यप्राणियों का शिकार किया है। यह घटना बोड़ला विकासखंड के कवर्धा बिट की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार ग्रामीणों और वनकर्मियों को जंगल क्षेत्र में दो वन भैंस मृत अवस्था में मिले। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पाया कि क्षेत्र में अवैध रूप से बिजली का तार फैलाया गया था, जिससे करंट लगने की संभावना जताई जा रही है। वन भैंसा राज्य का राजकीय पशु है और इसकी सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं प्रशासन की सतर्कता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। पिछले दो महीनों के भीतर चार वन भैंसों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौतों से यह साफ होता जा रहा है कि शिकारी सक्रिय हैं और वन्यजीव सुरक्षा तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर वन्यप्राणी संरक्षण, गश्त, कैमरा ट्रैप और सुरक्षा बलों की तैनाती के दावों के बीच इस तरह की घटनाएं उन दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं। घटना की सूचना मिलते ही वन मंडल अधिकारी, उप वन मंडल अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पूरे क्षेत्र को सील कर जांच शुरू कर दी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड की मदद ली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि करंट किस उद्देश्य से और किसने लगाया था।
वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। दोनों से पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल फोन तथा अन्य उपकरणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह मामला शिकार से जुड़ा पाया गया तो आरोपियों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लंबी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। स्थानीय ग्रामीणों में भी घटना को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण शिकारी बेखौफ हैं। वहीं वन विभाग का दावा है कि गश्त बढ़ाई जाएगी और संवेदनशील इलाकों में निगरानी और सख्त की जाएगी। फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है।
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